एक समय की बात है, एक साधु जो एक छोटे से गाँव में एक मंदिर का ध्यान रखता था। उसने भिक्षा ली और उन सब लोगो में वितरित कर दी जिन्होंने मंदिर को बनाने में मदद की थी। मंदिर में एक शरारती चूहा था जो साधु का भोजन चोरी कर रहा था चूहा साधु के लिए एक बड़ी समस्या बन गया। साधु ने बड़ी कोशिश की उस चूहे से छुटकारा पाने की लेकिन उसके सारे प्रयास व्यर्थ थे। लेकिन चूहा काफी तेज़ था,उसने अभी भी भोजन चोरी जारी रखा। चूहे ने चुराए गए भोजन का एक भंडार बनाया और वह छत से लटका हुआ मिट्टी के बर्तन तक चढ़ने में भी सक्षम था
गरम जामुन बहुत समय पहले की बात है, सुंदरवन में श्वेतू नामक एक बूढ़ा खरगोश रहता था। वह इतनी अच्छी कविता लिखता था कि सारे जंगल के पशु्पक्षी उन्हें सुनकर दातों तले उँगली दबा लेते और विद्वान तोता तक उनका लोहा मानता था। श्वेतू खरगोश ने शास्त्रार्थ में सुरीली कोयल और विद्वान मैना तक को हरा कर विजय प्राप्त की थी। इसी कारण जंगल का राजा शेर भी उसका आदर करता था। पूरे दरबार में उस जैसा विद्वान कोई दूसरा न था। धीरे-धीरे उसे अपनी विद्वत्ता का बड़ा घमण्ड हो गया। एक दिन वह बड़े सवेरे खाने की तलाश में निकला। बरसात के दिन थे, काले बादलों ने घिरना शुरू ही किया था। मौसम की पहली बरसात होने ही वाली थी। सड़क के किनारे जामुनों के पेड़ काले-काले जामुनों से भरे झुके हुए थे। बड़े-बड़े, काले, रसीले जामुनों को देखकर श्वेतू के मुँह में पानी भर आया। एक बड़े से जामुन के पेड़ के नीचे जाकर उसने आँखें उठाई और ऊपर देखा तो नन्हें तोतों का एक झुण...
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